‘मैगटैप’ को डेवलप करने वाले रोहन कुमार का कहना है कि उन्होंने अभी ही इसका अपडेटेड वर्जन ‘मैगटैप 2.0’ लांच किया है. इस नए अपडेट में कई और सुविधाएं जोड़ी गयी हैं, जिससे यह ऐप चीन की यूसी ब्राउज़र के साथ ही गूगल के क्रोम और ओपेरा ब्राउज़र से भी बेहतर साबित होगा.

चीन से झड़प और भारतीय जवानों की शहादत के बाद से ही भारत में एक बार फिर चीनी समान और 59 ऐप्स के बहिष्कार कर दिया है. ऐसे में गया के युवाओं द्वारा बनाया गया एक खास वेब ब्राउजर/ऐप चीनी ऐप्स को अच्छे से टक्कर दे रहा है. दरअसल, बिहार के तीन युवाओं ने ‘मैगटैप’ (MagTapp) नाम का वेब ब्राउज़र बनाया है, जो चाइनीज ऐप्स यूसी ब्राउज़र से बेहतर साबित हो रहा है. इस ऐप की खासियत इसकी ‘विजुअल डिक्शनरी’ है, जिससे बड़ी आसानी से किसी भी दूसरी भाषा के शब्द का अर्थ चित्र सहित अपनी भाषा में देखा-सुना जा सकता है.

ऐप को अब तक मिल चुके 10 लाख से अधिक यूजर

तीन चायनीज ऐप के अलग-अलग फीचर इस अकेले भारतीय ऐप मेंं हैं. ऐप के फाउंडर की मानेंं तो गूगल प्ले स्टोर पर लॉन्चिंग के कुछ दिन में ही इसे 8 लाख से ज्यादा बार डाउनलोड किया जा चुका है. फिलहाल इसकी रेटिंग 4.5 है और इसके 10 लाख से ज्यादा यूजर हैं.

नक्सल प्रभावित क्षेत्र से आते हैं सत्यपाल

नक्सल प्रभावित गया के इमामगंज प्रखंड के रहने वाले सत्यपाल चंद्रा अभाव और गरीबी के बीच प्रारंभिक पढाई पूरी कर कमाने के इरादे से दिल्ली चले गए. दिल्ली के ही एक रेस्टोरेंट में उन्हें इंग्लिश न जानने की वजह से वेटर ने झिड़क दिया. इसके बाद सत्यपाल ने करीब 6 माह दिनरात मेहनत कर अंग्रेजी बोलना-लिखना सीखा और एक के बाद एक कई अंग्रेजी उपन्यास लिख डाले. उनकी किताबें ‘द मोस्ट इलिजिबल बैचलर’ और ‘व्हेन हेवेन्स फॉल डाउन’ काफी चर्चित रही हैं. किताबें लिखने के बाद उन्होंने वेब सीरीज भी बनाईं और अब टेक्नोलॉजी की दुनिया में नाम कर रहे हैं.

पीएम के आत्मनिर्भर सपने को साकार करता है ये ऐप

मैगटैप ऐप बनाने वाली कंपनी ‘मैगटैप टेक्नोलॉजी’ का मुख्यालय मुंबई में है. यह कंपनी भारत सरकार के स्टार्टअप योजना से भी जुडी है. कंपनी के तीनों फाउंडर सत्यपाल चंद्रा, रोहन सिंह और अभिषेक बिहार के गया और समस्तीपुर के रहने वाले हैं. ‘मैगटैप’ को रोहन ने डिजाइन किया है. इसके टेक्निकल पक्षों को संभालने में उनके 18 साल के भाई अभिषेक सिंह मदद करते हैं.