गया की भूमि “मोक्ष’ के साथ-साथ “पालनहार’’ हैं। भगवान विष्णु का चरण व माता सती का पिंड भक्त साक्षात् दर्शन कर अद्भूत शांति का अनुभव करते हैं। पग-पग पर शिव मंदिरों का समृद्ध संसार है। प्राचीनतम् नगरी गयाधाम में करीब 6000 छोटे-बड़े मंदिर हैं। हर दिन भक्त आर्शीवचन के लिए भगवान के चरणों में मत्था टेकते थे, पर इतिहास में पहली बार कोरोना परिक्रमा ने मंदिरों के शहर को “लॉक” कर दिया।

पहली बार भक्त बिना भगवान रहे! 55 दिनाें से मंदिर का कपाट दर्शन के लिए बंद हैं। कोरोना संकट के चलते वे लोग भी अपने ईष्ट के चरणों में नहीं जा पा रहे हैं, जिन्होंने पूरा जीवन अपने दिन की शुरूआत मंदिर में दर्शन से ही की है। इक्के-दुक्के मंदिरों में ऑनलाइन दर्शन व आरती की सुविधा है। गया के विष्णुपद, शक्तिपीठ मां मंगलागौरी, मार्कण्डेय शिव मंदिर, दु:खहरणी मंदिर, मां बंगलामुखी मंदिर, मां शीतला मंदिर, रामशिला शिव मंदिर लग जाती है थी ।

भगवान विष्णु के चरण का साक्षात् दर्शन
स्थापना : कोई लिखित तारीख नहीं। 
जीर्णोद्धार : 1787 ई. में (इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने किया था)
जीर्णोद्धार के बाद 233 वर्ष में पहली बार बंद 
रोज औसत 15000 भक्त दर्शन करते हैं। 

शक्तिपीठ मां मंगलागौरी मंदिर 
माता सती का हैं पिंड 
स्थापना : कोई लिखित तारीख नहीं। 
जीर्णोद्धार : 1973 ई में 
मंदिर के इतिहास में पहली बार बंद 
रोज औसत 10000 भक्त दर्शन करते हैं। 

दु:खहरणी मंदिर
स्थापना : 1556 ई. में 
459 वर्ष में पहली बार बंद 
रोज औसत 3000 भक्त दर्शन करते हैं। 

मार्कण्डेय शिव मंदिर  
स्थापना : कोई लिखित तारीख नहीं। (मृकंडु ऋषि के पुत्र मार्कण्डेय ने की थी शिवलिंग की स्थापना)
जीर्णोद्धार : राजामान सिंह ने किया था। 
मंदिर के इतिहास में पहली बार बंद 
रोज औसत 1000 भक्त दर्शन करते हैं। 

रामशिला
देश का तीसरा स्फटिक शिवलिंग 
स्थापना: सन् 1886 ईं
134 वर्ष में पहली बार मंदिर बंद 
रोज औसत 1000 भक्त दर्शन करते हैं। 
बाबा कोटेश्वरनाथ धाम 

कामनासिद्धि महादेव 
स्थापना : द्वापरकाल (दैत्यराजा वानासुर की पुत्री उषा ने की सहस्त्रशिवलिंग की स्थापना)
मंदिर के इतिहास में पहली बार बंद
रोज औसत 2000 भक्त दर्शन करते हैं। 

सिद्धेश्वरनाथ शिव मंदिर 
स्थापना : कोई लिखित जानकारी नहीं (राजा वाणासुर ने स्थापित किया था शिवलिंग)
मंदिर के इतिहास में पहली बार बंद  
रोज औसत 2000 भक्त करते हैं दर्शन  

गया की पावन भूमि पर हैं चार पीढ़ी के महादेव: भारतीय तीर्थो का प्राण गया में यह मणिकांचन संयोग है कि शिवशंकर चार-चार पीिढ़यों से पूजित हैं उन्हें वृद्धपरपिता महेश्वर (अक्षयवट), परपिता महेश्वर (संकटा स्थान), पितामहेश्वर (शीतला मंदिर) और श्री मार्कण्डेय शिव के रूप में पूजा की जाती है।

Source : दैनिक भास्कर